वन मंत्री ने कहा पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व 'हरेला' के शुभ अवसर पर आज पूरे प्रदेश में एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया। पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और जनभागीदारी के इस पावन उत्सव के पहले ही दिन राज्य सरकार द्वारा तय किए गए 10 लाख पौधारोपण के लक्ष्य को जनता के अपार सहयोग से दोपहर 1 बजे से पहले ही ध्वस्त कर दिया गया। वन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 2 बजे तक पूरे प्रदेश में रोपे गए पौधों की संख्या 11 लाख के पार पहुंच चुकी थी। एक महीने तक चलने वाले इस महा-अभियान के तहत राज्य में कुल एक करोड़ पौधे लगाने का महा-लक्ष्य रखा गया है।

हरेला पर्व पर सुबह 7 बजे से ही पूरे प्रदेश में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हाथों में पौधे लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में रोपण के लिए उमड़ पड़े। मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं पौधारोपण कर इस राज्यव्यापी महा-अभियान की शुरुआत की। देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की अगुवाई वन मंत्री सुबोध उनियाल ने की। दोनों ही मंडलों में स्कूली बच्चों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। देहरादून में पौधारोपण के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने एक नई और अनुकरणीय पहल की। उन्होंने केवल नए पौधे लगाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वर्ष 2024 और 2025 के हरेला अभियान के दौरान लगाए गए पौधों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण भी किया। पौधों की अच्छी ग्रोथ पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा केवल पौधारोपण कर देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। हमारा उद्देश्य आंकड़ों की बाजीगरी दिखाना नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों का पूर्ण संरक्षण करना है। पूर्व में रोपे गए पौधों की अच्छी स्थिति यह दर्शाती है कि हमारा वन विभाग केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पौधों को जीवित रखने पर भी उतना ही ध्यान दे रहा है। पर्यावरण संरक्षण और सुसंगत विकास के बीच संतुलन बनाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। देहरादून-ऋषिकेश हाईवे के सात मोड़ पर पेड़ कटान के विरोध में कुछ संगठनों द्वारा चलाए जा रहे 'ब्लैक हरेला अभियान' पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कुछ लोग केवल सस्ती लोकप्रियता और प्रचार-प्रसार के लिए विकास कार्यों की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। जिन विकास परियोजनाओं को लेकर विरोध जताया जा रहा है, उनके लिए सभी आवश्यक कानूनी, तकनीकी और पर्यावरणीय अनुमतियां पहले ही ली जा चुकी हैं। तथ्यों को नजरअंदाज कर इस प्रकार का विरोध करना कहीं से भी तर्कसंगत नहीं है। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति में 'हरेला' का अर्थ 'हरियाली' से है। यह प्रकृति को समर्पित देवभूमि का एक पारंपरिक लोकपर्व है, जो यह संदेश देता है कि मानव जीवन का अस्तित्व तभी तक सुरक्षित है जब तक हमारी नदियां, पहाड़ और जंगल सुरक्षित हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस पारंपरिक त्योहार को सरकार ने एक विशाल जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। पहले दिन की यह ऐतिहासिक शुरुआत दर्शाती है कि देवभूमि के नागरिक अपनी प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिए पूरी तरह सजग और संकल्पबद्ध हैं।