Meta की AI रणनीति हो सकती है Instagram एन्क्रिप्शन हटाने की वजह

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नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में शामिल Instagram एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला यूजर्स की निजी चैट और डिजिटल प्राइवेसी से जुड़ा हुआ है। 8 मई से इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज यानी DM में मिलने वाला एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन फीचर खत्म किए जाने की खबर ने टेक जगत में नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या इंस्टाग्राम पर होने वाली निजी बातचीत वास्तव में सुरक्षित रहेगी? क्या कंपनी अब यूजर्स के मैसेज पढ़ सकेगी? और क्या यह कदम AI को ट्रेन करने के लिए उठाया गया है? पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल दुनिया में “प्राइवेसी” सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निजी बातें करते हैं, फोटो-वीडियो शेयर करते हैं और कई बार बेहद संवेदनशील जानकारी भी साझा करते हैं। ऐसे में एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन को यूजर्स की सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच माना जाता रहा है। एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन का सीधा मतलब होता है कि किसी चैट को केवल भेजने वाला और प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही पढ़ सकता है। यहां तक कि प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी भी उस चैट को एक्सेस नहीं कर सकती। यही कारण था कि टेक कंपनियां इसे “गोल्ड स्टैंडर्ड ऑफ प्राइवेसी” कहती रही हैं। इंस्टाग्राम में यह फीचर पहले ऑप्शनल था। यानी यूजर चाहे तो अपने चैट को एन्क्रिप्टेड बना सकता था। लेकिन अब इसे हटाए जाने की खबर ने करोड़ों यूजर्स को चिंता में डाल दिया है। कंपनी का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल बहुत कम लोग कर रहे थे, इसलिए इसे बंद किया जा रहा है। लेकिन टेक एक्सपर्ट्स इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहे। उनका मानना है कि असली वजह कुछ और हो सकती है। दरअसल, आज पूरी टेक इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दौड़ में शामिल है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने AI मॉडल को अधिक स्मार्ट बनाने के लिए विशाल मात्रा में डेटा जुटा रही हैं। यूजर्स की बातचीत, उनकी पसंद, भाषा, व्यवहार और प्रतिक्रियाएं AI ट्रेनिंग के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती हैं।

यही वजह है कि कई विशेषज्ञों को आशंका है कि एन्क्रिप्शन हटाने के बाद कंपनी के लिए यूजर्स के चैट डेटा तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा उपलब्ध हो सकता है। हालांकि कंपनी की ओर से इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संदेह लगातार गहराता जा रहा है। यह पूरा मामला इसलिए भी दिलचस्प बन जाता है क्योंकि WhatsApp, जो उसी कंपनी का हिस्सा है, वहां एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है। WhatsApp अपनी प्राइवेसी को हमेशा अपनी सबसे बड़ी ताकत बताता रहा है। कंपनी कई विज्ञापनों और अभियानों में यह दावा कर चुकी है कि “आपकी चैट केवल आपकी है।” ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि एक ही कंपनी के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर प्राइवेसी के अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं? अगर एन्क्रिप्शन सुरक्षा के लिए जरूरी है तो WhatsApp में यह अनिवार्य क्यों है और Instagram में इसे खत्म क्यों किया जा रहा है?

टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन के यूजर्स की चैट पहले जितनी सुरक्षित नहीं रह जाती। साइबर अपराधियों और हैकर्स के लिए डेटा चोरी का खतरा बढ़ सकता है। यदि किसी सिस्टम में सेंध लगती है तो निजी बातचीत लीक होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। आज के दौर में साइबर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। डेटा लीक, अकाउंट हैकिंग और डिजिटल जासूसी जैसे खतरे पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो चुके हैं। ऐसे समय में एन्क्रिप्शन हटाने का फैसला कई लोगों को उल्टा कदम लग रहा है। दूसरी तरफ टेक कंपनियों और सरकारों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि मजबूत एन्क्रिप्शन की वजह से अपराध, फर्जी गतिविधियों और अवैध कंटेंट पर निगरानी रखना मुश्किल हो जाता है। कई बार जांच एजेंसियां भी जरूरी जानकारी तक नहीं पहुंच पातीं।

यही कारण है कि दुनियाभर में सरकारें टेक कंपनियों से अधिक एक्सेस की मांग करती रही हैं। लेकिन प्राइवेसी समर्थकों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर यूजर्स की निजी स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि यदि कंपनियों को लोगों की निजी बातचीत तक पहुंच मिलती है तो यह भविष्य में बड़े दुरुपयोग का रास्ता खोल सकता है। यह विवाद केवल Instagram तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में Meta समेत कई बड़ी टेक कंपनियां डेटा कलेक्शन और प्राइवेसी को लेकर सवालों के घेरे में रही हैं। यूजर्स लगातार यह पूछ रहे हैं कि आखिर उनका डेटा कितना सुरक्षित है और उसका इस्तेमाल कहां हो रहा है। इंस्टाग्राम का यह कदम डिजिटल दुनिया में चल रही उसी बड़ी बहस को और तेज कर सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बनेगा। आज जब सोशल मीडिया लोगों की निजी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, तब प्राइवेसी केवल एक फीचर नहीं बल्कि भरोसे का सवाल बन गई है। ऐसे में Instagram का यह फैसला यूजर्स और टेक कंपनियों के बीच उस भरोसे की नई परीक्षा माना जा रहा है।