पटना। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी 2026' आज बिहार भर में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू हो गई है। राज्य के 35 चुनिंदा जिलों में कुल 331 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ प्रशासन की कड़ी निगरानी में परीक्षा का संचालन किया जा रहा है। इस वर्ष बिहार से कुल 1,56,061 अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है, जो डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए आज परीक्षा हॉल में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक विवाद को देखते हुए इस बार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और बिहार पुलिस-प्रशासन बेहद मुस्तैद और अलर्ट मोड पर नजर आ रहे हैं। परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सभी 331 केंद्रों पर 'थ्री-लेयर' (त्रिस्तरीय) सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। केंद्रों के मुख्य द्वार पर प्रवेश की समय सीमा दोपहर 1:30 बजे समाप्त हो गई, जिसके बाद गेट पूरी तरह लॉक कर दिए गए। परीक्षा हॉल में जाने से पहले हर एक परीक्षार्थी को तीन अलग-अलग सुरक्षा चक्रों से गुजरना पड़ा, जिसमें सघन शारीरिक जांच, मेटल डिटेक्टर से चेकिंग और कड़ा बायोमेट्रिक सत्यापन शामिल था। दोपहर 2:00 बजे से परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो चुकी है। इस पुनर्परीक्षा ने उन हजारों छात्रों को एक बार फिर मानसिक कशमकश में डाल दिया है, जिन्होंने इस परीक्षा के लिए सालों मेहनत की थी। गया के खरखुरा इलाके से परीक्षा देने आए छात्र कुणाल कुमार की कहानी इस अनिश्चितता के दर्द को बयां करती है। कुणाल इस री-एग्जाम को मिलाकर तीसरी बार नीट की परीक्षा में बैठ रहे हैं। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए बताया:
"मैंने साल 2025 में पहली बार नीट दिया था, तब 300 से अधिक स्कोर आया था। बेहतर कॉलेज के लिए मैंने ड्रॉप लिया और पूरा एक साल दिन-रात कड़ी मेहनत की। मेरा पिछला पेपर भी बहुत शानदार गया था, लेकिन पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हो गई। बार-बार परीक्षा के टलने और दोबारा होने से मन बहुत विचलित और तनाव में है। अब आगे क्या होगा, यह तो परीक्षा खत्म होने के बाद ही पता चलेगा। बिहार सरकार और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा छात्रों को दी गई मुफ्त बस सेवा की सुविधा इस भीषण गर्मी में परीक्षार्थियों के लिए बड़ी राहत साबित हुई। उदाहरण के तौर पर, अकेले गया जिले में ही 600 से अधिक परीक्षार्थियों ने इन सरकारी बसों के जरिए निशुल्क सफर तय कर अपने-अपने परीक्षा केंद्रों तक का सफर तय किया। गयाजी में विशेष रूप से 6 बड़ी सरकारी बसों का परिचालन इस कार्य के लिए किया गया। जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार ने खुद गयाजी रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहकर पूरी व्यवस्था की कमान संभाली। उन्होंने बताया कि सुबह 8:00 बजे से ही सभी चिह्नित चौराहों और स्टेशनों पर बसें तैनात कर दी गई थीं। अकेले गयाजी स्टेशन से 3 बसों के जरिए 100 से अधिक छात्रों को समय पर उनके सेंटरों तक ड्रॉप किया गया। प्रशासन ने छात्रों की सुविधा का ख्याल केवल परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भी रखा है। जिला परिवहन अधिकारी के अनुसार, शाम को परीक्षा समाप्त होने से पहले ही सभी परिवहन बसों को दोबारा परीक्षा केंद्रों के बाहर लाइनअप कर दिया जाएगा। इससे परीक्षा देकर निकलने वाले छात्र बिना किसी परेशानी और बिना किसी किराए के सीधे रेलवे स्टेशन या मुख्य बस स्टैंड तक पहुंच सकेंगे। छात्रों को बस यात्रा के दौरान केवल अपना नीट एडमिट कार्ड दिखाना होगा, जिसके बाद कंडक्टर द्वारा उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। फिलहाल, पूरे राज्य में परीक्षा शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त माहौल में चल रही है।

