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राजपाल यादव कोर्ट केस अपडेट: सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान की डेडलाइन तय की

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नई दिल्ली। अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। करीब 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान अभिनेता के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने पाया कि 15 सितंबर को दिए गए निर्देश के बावजूद राजपाल यादव ने तय रकम जमा नहीं की। अब कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है और कड़ा आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पेश की गई। दस्तावेज को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई और अभिनेता की ओर से किए गए भुगतान के दावे पर सवाल उठाए। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि शिकायतकर्ता को उसकी रकम दिलाने के मामले में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, 'इस अहंकार को उसकी सही जगह पर रखना होगा। आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है।' कोर्ट के इस बयान के बाद ये समझा जा सकता है कि भुगतान के मामले में अदालत अब किसी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह राजपाल यादव की याचिका खारिज करने के पक्ष में है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं कर रही है, ताकि शिकायतकर्ता को उसकी रकम मिल सके। कोर्ट ने भुगतान करने के लिए कल तक का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई परसों होगी और इसे उस दिन की सुनवाई की सूची में सबसे ऊपर रखा जाएगा। यानी राजपाल यादव को अब कोर्ट के निर्देश के मुताबिक तय समय के अंदर भुगतान करना होगा। दरअसल, साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुर्गली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से पांच करोड़ रुपये की राशि लोन के रूप में ली थी। 'अता पता लापता' बॉक्स ऑफिस पर चली नहीं। कथित तौर पर राजपाल यादव को आर्थिक नुकसान हुआ। कर्ज के रूप में ली गई कंपनी की धनराशि वे लौटा नहीं पाए। कंपनी ने राजपाल यादव के खिलाफ केस किया और साथ ही यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने लोन वापस करने के लिए जो कुछ चेक जारी किए थे वे सभी बाउंस हो गए। एक्टर के खिलाफ चेक बाउंस का केस दर्ज किया गया। ये चेक फिल्म प्रोडक्शन के लिए दिए गए थे, लेकिन पैसे नहीं मिले।