देहरादून। डिजिटल गवर्नेंस और आपराधिक न्याय प्रणाली को तकनीक से लैस करने के अभियान में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य शीर्ष समिति की समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के क्रियान्वयन में उत्तराखंड पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स की राष्ट्रीय रैंकिंग में भी राज्य ने 4 पायदान का बड़ा सुधार करते हुए 9वां स्थान हासिल किया है।
उत्तराखंड में पुलिसिंग व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने और अपराध से संबंधित सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान की दिशा में राज्य ने अपनी डिजिटल स्थिति मजबूत की है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) परियोजना के तहत राज्य शीर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें सीसीटीएनएस/आईसीजेएस 2.0 की प्रगति, तकनीकी ढांचे, नेटवर्क कनेक्टिविटी, डेटा रिकवरी सेंटर, आवश्यक उपकरणों और सिस्टम इंटीग्रेटर से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड में उत्तराखंड ने जुलाई 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर नौवीं रैंक हासिल की है। पिछली समीक्षा में राज्य 13वें स्थान पर था। इस तरह उत्तराखंड ने अपनी राष्ट्रीय रैंकिंग में चार पायदान का सुधार किया है। वहीं आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड में उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है। अधिकारियों के अनुसार आईसीजेएस 2.0 के तहत राज्य में विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। बैठक में एनसीएलआई डैशबोर्ड की प्रगति भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। अधिकारियों ने बताया कि 17 सितंबर 2026 तक उत्तराखंड ने एनसीएलआई में 18वीं रैंक हासिल की है। पिछली समीक्षा में राज्य 24वें स्थान पर था। यानी इस मोर्चे पर भी राज्य ने छह पायदान की प्रगति दर्ज की है। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को डिजिटल प्रणालियों में निर्धारित मानकों के अनुरूप लगातार सुधार करने के निर्देश दिए। आईसीजेएस 2.0 के तहत राज्य में नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। राज्य योजना के तहत पुलिस, अभियोजन, कारागार और फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल से संबंधित कुल 242 साइटों को शामिल किया गया है। कनेक्टिविटी के लिए एसडब्ल्यूयूएएन, बीएसएनएल और लोकल वीपीएन के माध्यम से व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि राज्य के 166 पुलिस स्टेशनों में से 31 को अपग्रेड किया जा चुका है। बैठक में तकनीकी ढांचे को और मजबूत करने के साथ ही शेष आवश्यकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया। सीसीटीएनएस के महत्वपूर्ण डेटा की सुरक्षा और आपात स्थिति में उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डेटा रिकवरी सेंटर की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आईटीडीए को सीसीटीएनएस के लिए अलग डेटा रिकवरी इकोसिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डेटा रिकवरी सेंटर ऐसा हो, जिससे महत्वपूर्ण सेवाओं की निरंतरता बनी रहे और किसी तकनीकी समस्या या आपदा की स्थिति में महत्वपूर्ण डाटा को सुरक्षित तरीके से पुनः प्राप्त किया जा सके। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, रिकवरी क्षमता और भौगोलिक रूप से अलग सुरक्षित रिकवरी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। मुख्य सचिव ने गृह विभाग और आईटीडीए को एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में भी सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म विकसित किया जाए, जिसके तहत एफआईआर दर्ज करते समय ही संबंधित व्यक्ति का नाम, पूरा पता, मोबाइल फोन नंबर, ई-मेल और अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट एवं सही तरीके से दर्ज हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य ई-समन और अन्य वैधानिक कार्रवाई को संबंधित व्यक्ति तक सही, स्पष्ट और जल्द पहुंचाना है। मुख्य सचिव के मुताबिक इससे डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था की उपयोगिता बढ़ने के साथ परिचालन दक्षता में भी सुधार होगा। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अगले दो माह के भीतर निर्धारित विभिन्न पैरामीटर में सुधार, लक्ष्यों को बढ़ाने और ऑपरेशनल प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक से साफ है कि उत्तराखंड में अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिसिंग को डेटा आधारित और डिजिटल बनाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

