अमेरिका-ईरान तनाव की चपेट में बिहार का लाल: दुबई में शिप पर कार्यरत युवक की मौत, गोपालगंज में पसरा मातम

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गोपालगंज। पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका और ईरान के बीच के भीषण युद्ध की तपिश अब बिहार के आंगन तक पहुंच गई है। खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य टकराव के दौरान दुबई में एक मर्चेंट शिप (समुद्री जहाज) पर कार्यरत गोपालगंज के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान थावे प्रखंड के थावे बाजार निवासी व्यवसायी संजय गुप्ता के 30 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। सोनू पिछले चार वर्षों से दुबई की एक प्रतिष्ठित शिपिंग कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस अंतरराष्ट्रीय हादसे की खबर जैसे ही गृह जनपद पहुंची, मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। 

परिजनों को सोमवार की रात सोनू के साथ काम करने वाले सहकर्मियों ने फोन कर इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे की जानकारी दी। सहकर्मियों के मुताबिक, ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए जा रहे भीषण हवाई हमलों के दौरान सऊदी अरब के निकट सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील हॉरमुज समुद्री क्षेत्र में उनके जहाज पर भारी गोलाबारी हुई। तनावग्रस्त क्षेत्र से गुजरते समय एक कथित मिसाइल हमले के बाद आसमान से आग का गोला और धधकता हुआ मलबा सीधे शिप पर आ गिरा। इस भयावह चपेट में आने से सोनू कुमार गंभीर रूप से झुलस गए और घायल हो गए, जिन्होंने बाद में दम तोड़ दिया। फोन करने वाले सहकर्मियों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में लगातार हो रहे हवाई हमलों के कारण समुद्र में मौजूद अन्य नाविक भारी दहशत में हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। सोनू के परिजनों ने रुंधे गले से बताया कि वह अभी महज 20 दिन पहले ही अपने घर पर परिजनों के साथ हंसी-खुशी छुट्टियां बिताकर वापस दुबई ड्यूटी पर लौटे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि सोनू से यह उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी। सोनू अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उनके पिता संजय गुप्ता थावे बाजार में एक छोटी सी जूता-चप्पल की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बेटे की मौत की आधिकारिक और अनौपचारिक सूचना मिलते ही थावे के विदेशी टोला स्थित उनके पैतृक आवास पर चीख-पुकार मच गई। मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की खबर जंगल की आग की तरह फैलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आसपास के सैकड़ों लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं। इकलौते कमाऊ बेटे को खो चुके बूढ़े माता-पिता की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से पीड़ित परिवार अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, ताकि युद्ध क्षेत्र की औपचारिकताओं के बीच सोनू के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत (गोपालगंज) वापस लाया जा सके और उसका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया जा सके।