दिल्ली की तरह पटना में उग्र प्रदर्शन, छात्रों ने पुलिस-मीडिया पर चलाए रोड़े, सीएम आवास के पास लाठीचार्ज

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पटना। बिहार की राजधानी पटना बुधवार को छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा और भारी हंगामे का केंद्र बन गई। वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में निकला प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह तीखी झड़प हुई, पथराव की घटनाएं सामने आईं और हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन और अंततः लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। उग्र प्रदर्शन मुख्यमंत्री आवास के आसपास तक पहुंच गया, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

प्रदर्शन की शुरुआत गांधी मैदान के समीप जयप्रकाश नारायण गोलंबर से हुई। प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहा होते हुए राजभवन और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक रखा था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़ गए और पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस वाहनों को भी निशाना बनाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पटना आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी पर भी हमला किया गया। मौके पर मौजूद कुछ मीडिया कर्मियों को भी पथराव का सामना करना पड़ा, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ लगातार आगे बढ़ती रही। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और वाटर कैनन से पानी की बौछार कर भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया गया। हालांकि प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में बंटकर बेली रोड की ओर बढ़ते रहे और मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री आवास के आसपास तक पहुंच गए। डिप्टी सीएम आवास और लोक भवन मार्ग के बीच पुलिस ने लाठीचार्ज कर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई। विधानसभा परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई तथा एहतियात के तौर पर विधायकों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने कई मांगें उठाईं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण पर रोक, जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन, 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करने, फीस वृद्धि वापस लेने, नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने तथा पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने जैसी मांगें शामिल थीं। हालांकि प्रदर्शन के हिंसक होने के कारण ये मुद्दे पीछे छूट गए और पूरे घटनाक्रम का केंद्र कानून-व्यवस्था बन गया। इधर, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके विरोध मार्च के दौरान हमला किया और पहले से लाठी-डंडों व पत्थरों के साथ तैयारी कर रखी थी। भाजपा ने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित बताते हुए आरोप लगाया कि राजधानी का माहौल जानबूझकर बिगाड़ने की कोशिश की गई। वहीं बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि विपक्ष छात्र हितों की आवाज उठाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सड़क पर उतरा है। उनका कहना था कि छात्र विरोधी नीतियों और शिक्षा संबंधी समस्याओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जा रही है तथा केंद्र सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। फिलहाल पुलिस ने हिंसा, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज तथा वीडियो के आधार पर अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।