मोतिहारी चीनी मिल जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई: 14 एकड़ भूमि के गलत परिमार्जन पर राजस्व कर्मचारी निलंबित

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मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी चीनी मिल की अरबों रुपये मूल्य की 14 एकड़ बेशकीमती जमीन के संदिग्ध हस्तांतरण और गलत परिमार्जन (डिजिटल रिकॉर्ड सुधार) मामले में जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के नवपदस्थापित जिलाधिकारी (डीएम) सौरभ सुमन यादव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। राजस्व कर्मचारी पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने वाली गलत जांच रिपोर्ट तैयार की थी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राजस्व कर्मचारी ने तीन अलग-अलग आवेदनों पर आंख मूंदकर गलत अनुशंसा की थी। इसी फर्जी रिपोर्ट को आधार बनाकर चीनी मिल की 14 एकड़ सरकारी भूमि का नियम विरुद्ध ऑनलाइन परिमार्जन कर दिया गया था। हालांकि, यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका। सदर भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) के संज्ञान में जैसे ही यह संदेहास्पद मामला आया, उन्होंने तुरंत मुस्तैदी दिखाई। डीसीएलआर की सतर्कता के कारण सरकारी पोर्टल पर इस गलत परिमार्जन को तुरंत रद्द करते हुए 'शून्य' (Zero) कर दिया गया, जिससे सरकारी जमीन की बंदरबांट होने से बच गई। इस निलंबन के बाद प्रशासनिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाली चर्चा आम हो गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जिले के ही एक बड़े रसूखदार अधिकारी के डेटा ऑपरेटर ने इस पूरे खेल की स्क्रिप्ट लिखी थी। उसने राजस्व कर्मचारी पर 'साहब का कड़ा आदेश है' कहकर फाइल आगे बढ़ाने का भारी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया था। इसी दबाव के आगे घुटने टेकते हुए कर्मचारी ने गलत रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। हालांकि, डीएम ने इसे गंभीर कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और घोर आचरण दोष माना है। राजस्व कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव ने तीनों परिमार्जन मामलों में गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता बरती है। उनका यह आचरण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के सर्वथा खिलाफ है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान कृष्णा कुमार श्रीवास्तव का मुख्यालय सदर अंचल से हटाकर अंचल कार्यालय, अरेराज तय किया गया है। नियमानुसार इस अवधि में उन्हें केवल जीवन-निर्वाहन भत्ता ही देय होगा। इसके साथ ही डीएम ने सदर अंचलाधिकारी (सीओ) को सख्त निर्देश दिया है कि वे दोषी कर्मचारी के खिलाफ विस्तृत आरोप पत्र (प्रपत्र 'क') तैयार करें। इस आरोप पत्र को अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में समाहर्ता पूर्वी चंपारण को सौंपना होगा, जिसके बाद बड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। मोतिहारी चीनी मिल की जमीन का यह विवाद काफी पुराना और संवेदनशील रहा है। नए डीएम के इस ताबड़तोड़ एक्शन ने पूरे राजस्व महकमे और भू-माफियाओं के सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासनिक हल्कों में अब इस बात की चर्चा सबसे तेज है कि जांच की आंच आखिर कहां तक जाएगी? चूंकि मामले में 'साहब के नाम' का इस्तेमाल कर दबाव बनाने वाले ऑपरेटर की भूमिका सामने आई है, इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस रैकेट में शामिल अन्य सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों पर कब और कैसी गाज गिरती है।