बिहार की बेटी का अमेरिका में डंका: सिवान की श्रेया कौशिक को मिली ₹3 करोड़ की प्रतिष्ठित 'लिंकन स्कॉलरशिप',दुनिया भर में चुनी गईं इकलौती भारतीय

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पटना। पटना। बिहार की बेटी श्रेया कौशिक ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सिवान की 18 वर्षीय होनहार छात्रा श्रेया का चयन अमेरिका के प्रतिष्ठित सेंटर कॉलेज की लिंकन स्कॉलरशिप के लिए हुआ है, जिसकी कुल कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस वर्ष दुनिया भर से चुने गए केवल 10 विद्यार्थियों में श्रेया इकलौती भारतीय हैं। इस उपलब्धि की जानकारी डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक एवं सीईओ शरद विवेक सागर ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने श्रेया की सफलता को लाखों छात्रों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि सही मार्गदर्शन, अवसर और मेहनत के बल पर किसी भी साधारण पृष्ठभूमि का छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।

बिहार के सिवान में जन्मी श्रेया कौशिक की शुरुआती शिक्षा नई दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय, आया नगर में हुई। छात्र जीवन के दौरान उनकी प्रतिभा को डेक्सटेरिटी ग्लोबल ने पहचानकर उन्हें नेतृत्व विकास, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और वैश्विक उच्च शिक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया। इसी मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर श्रेया ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कीं, जिसका परिणाम अब दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित छात्रवृत्तियों में से एक के रूप में सामने आया है। लिंकन स्कॉलरशिप अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की स्मृति में दी जाती है। यह सम्मान उन चुनिंदा विद्यार्थियों को मिलता है, जिन्होंने शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन किया हो। हर वर्ष दुनिया भर से हजारों छात्र इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन कठोर चयन प्रक्रिया के बाद केवल कुछ ही विद्यार्थियों को यह सम्मान मिल पाता है। इस प्रतिष्ठित फुल स्कॉलरशिप के तहत श्रेया की चार वर्ष की स्नातक शिक्षा का पूरा खर्च सेंटर कॉलेज वहन करेगा। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास, भोजन, किताबें, स्वास्थ्य बीमा, हवाई यात्रा तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक और व्यक्तिगत खर्च शामिल हैं। इस तरह उन्हें आर्थिक चिंता से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई और शोध पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर श्रेया कौशिक ने कहा कि एक साधारण परिवार और सरकारी स्कूल से निकलकर इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्राप्त करना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग समाज और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए करना है। उनका मानना है कि यदि प्रतिभा को सही अवसर मिले तो कोई भी छात्र वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकता है। श्रेया कौशिक की यह उपलब्धि न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय प्रतिभाएं अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं। बिहार की इस बेटी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी पहचान या पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती।