सहरसा। यह कहानी साबित करती है कि अगर सपने बड़े हों और मेहनत सच्ची हो तो आर्थिक अभाव भी मंजिल की राह नहीं रोक सकते। बिहार के सहरसा जिले के तुलसियाही वार्ड-1 के एक साधारण किराना दुकानदार के घर से एक साथ तीन डॉक्टर निकलने की कहानी आज पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन गई है। नीट-2026 में एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों ने शानदार सफलता हासिल कर अपने माता-पिता का वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। तीनों भाई-बहनों में सबसे बड़े रजनीश कुमार (21) ने ऑल इंडिया रैंक 3122, बहन साक्षी कुमारी (20) ने 9672 और सबसे छोटे भाई प्रहलाद कुमार (18) ने 26751 रैंक हासिल की है। अब तीनों मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। एक ही परिवार के तीन बच्चों का देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल नीट में सफल होना पूरे सहरसा जिले के लिए गौरव का विषय बन गया है।
इस सफलता के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत और माता-पिता के संघर्ष की कहानी छिपी है। तीनों के पिता रोहित कुमार तुलसियाही वार्ड-1 में एक छोटी सी किराना दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां पूनम देवी गृहिणी हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। आर्थिक चुनौतियों के बीच भी बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया और बच्चों ने भी अपने माता-पिता के विश्वास को मेहनत के दम पर सच साबित कर दिया। सबसे छोटे भाई प्रहलाद कुमार, जिन्होंने पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की, ने बताया कि उन्होंने नियमित रूप से सेल्फ स्टडी की और शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो जब चार घंटे से कम पढ़ाई की हो। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कोचिंग शिक्षकों और अपने बड़े भाई-बहन को दिया। प्रहलाद ने कहा कि घर का माहौल हमेशा पढ़ाई के अनुकूल रहा और परिवार ने उन्हें कभी हार मानने नहीं दी। वहीं बड़े भाई रजनीश कुमार के लिए यह तीसरा प्रयास था। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों की लगातार मेहनत के बाद सफलता मिली है और सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि उनके साथ भाई और बहन भी सफल हुए। दूसरी ओर साक्षी कुमारी, जिन्होंने भी तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की, ने बताया कि वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और परीक्षा नजदीक आने पर यह समय बढ़ाकर 13 घंटे तक कर देती थीं। उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। तीनों भाई-बहनों ने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई सहरसा के प्रगति क्लासेज से की। इसके बाद शहर में कमरा लेकर पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। नियमित 10 से 12 घंटे पढ़ाई, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास, समय का बेहतर प्रबंधन और अनुशासित दिनचर्या उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रही। परिवार के अनुसार, तीनों ने सोशल मीडिया और अन्य अनावश्यक गतिविधियों से दूरी बनाकर केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो साक्षी ने 10वीं और 12वीं बिहार बोर्ड से पूरी की। रजनीश ने 10वीं सीबीएसई बोर्ड के जीवन दीप स्कूल और 12वीं बिहार बोर्ड से एसएनएस कॉलेज से उत्तीर्ण की। वहीं प्रहलाद ने 10वीं जीवन दीप स्कूल (सीबीएसई) और 12वीं सीहौल हाई स्कूल (बिहार बोर्ड) से पूरी की। मां पूनम देवी भावुक होकर कहती हैं कि बच्चों ने परिवार की कठिनाइयों को बहुत करीब से देखा है और उसी संघर्ष ने उन्हें मेहनत करने की प्रेरणा दी। आज उनकी सफलता पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। तीनों भाई-बहनों की इस उपलब्धि से पूरे तुलसियाही वार्ड-1 में जश्न का माहौल है। रिश्तेदार, पड़ोसी और स्थानीय लोग लगातार उनके घर पहुंचकर शुभकामनाएं दे रहे हैं। सहरसा का यह परिवार आज उन लाखों विद्यार्थियों के लिए मिसाल बन गया है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं। यह सफलता बताती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

