बिहार की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त सुस्ती को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभाग के छह बड़े और रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया है। सरकार का यह दंडात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। विभागीय सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार,इस बड़ी कार्रवाई की जद में कई जिलों के वर्तमान और पूर्व आला अधिकारी आए हैं। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून को छात्रों के विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करने के एवज में अवैध रूप से मोटी रकम (घूस) लेने का आरोप सिद्ध होने के बाद सस्पेंड कर दिया गया है। उनका निलंबन आदेश 18 मई से प्रभावी हो गया है। तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी पर वित्तीय हेरफेर और घोटाले के गंभीर आरोप सही पाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग ने उनके खिलाफ न सिर्फ कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू की है, बल्कि उन्हें सरकारी सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त करने की अनुशंसा भी कर दी है। भ्रष्टाचार की यह आंच बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड तक भी पहुंच गई है। बोर्ड के तत्कालीन सचिव राजेश कुमार पर अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय डंडा चला है। इसके अलावा, तीन अन्य जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों पर भी गाज गिरी है। बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सह वर्तमान में पूर्वी चंपारण के डीपीओ पवन कुमार को कार्य में ढिलाई बरतने के आरोप में नापा गया है। वहीं, बांका के ही एक अन्य सेवानिवृत्त डीपीओ देवेंद्र कुमार झा पर भी रिटायरमेंट के बाद वित्तीय अनियमितता के मामले में दंडात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। सुपौल के तत्कालीन डीपीओ रामाशीष महतो पर भी शिक्षकों की बहाली और नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितता बरतने के आरोपों के आधार पर विभागीय शिकंजा कसा गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "बिहार के शिक्षा विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या कर्तव्यहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों के भविष्य और सरकारी खजाने से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ यह सफाई अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी आरोपी अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई में भविष्य की वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) पर स्थायी रोक, चालू वेतन और सेवानिवृत्त हो चुके अफसरों की पेंशन में भारी कटौती जैसे कड़े आर्थिक दंड शामिल किए गए हैं, ताकि पूरे प्रशासनिक अमले को कड़ा संदेश दिया जा सके।

